गंगा स्नान वीडियो विवाद: AI और डीपफेक के जरिए महिला के वीडियो से छेड़छाड़ का मामला
उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित गंगा घाट से जुड़े दो अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में साइबर फ्रॉड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर महिला की मर्यादा भंग करने का आरोप सामने आया है।
पूरा मामला और वायरल वीडियो का सच
- दो वीडियो और संदिग्ध समानता: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक महिला को गंगा नदी में बेहद कम कपड़ों (सेमी-न्यूड/बिकिनी) में डुबकी लगाते दिखाया गया। इसके कुछ समय बाद ही एक और वीडियो सामने आया, जिसमें वही महिला पूरी तरह से शालीन पोशाक (सलवार-सूट) में गंगा स्नान करती दिख रही है।
- समान गतिविधियां: दोनों ही वीडियो में बैकग्राउंड, महिला के आसपास स्नान कर रहे अन्य लोगों (एक युवक और बुजुर्ग व्यक्ति) की मौजूदगी और पानी में उतरने का मूवमेंट बिल्कुल एक समान है।
- मूल (Original) वीडियो का सच: पीड़िता (सोनम यादव) ने सामने आकर स्पष्ट किया कि उन्होंने 6 जून को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पूरी तरह से सलवार-सूट पहनकर गंगा स्नान का मूल वीडियो पोस्ट किया था।
- AI और डीपफेक से छेड़छाड़: शरारती तत्वों ने मूल वीडियो को डाउनलोड करके AI एडिटेड और डीपफेक टूल्स की मदद से महिला के कपड़े बदलकर उसे सेमी-न्यूड रूप में बदला और अश्लीलता फैलाने तथा धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से वायरल कर दिया।
कानूनी कार्रवाई और श्री गंगा सभा का आक्रोश
- साइबर पुलिस में शिकायत: पीड़िता ने इस मामले को लेकर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है और वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
- तीर्थ पुरोहितों में गुस्सा: हरिद्वार में गंगा घाटों की व्यवस्था देखने वाली संस्था ‘श्री गंगा सभा’ के पदाधिकारियों और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने इस पर गहरा रोष जताया है। उन्होंने इसे धार्मिक स्थल को बदनाम करने और सनातन परंपरा पर आघात करने वाला कृत्य बताया है।
- कड़ी कार्रवाई की मांग: श्री गंगा सभा ने उत्तराखंड शासन और पुलिस प्रशासन से AI का दुरुपयोग कर अश्लीलता फैलाने वाले असमाजिक तत्वों पर तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।










